गुवाहाटी में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
बारिशों ने गुवाहाटी शहर की हकीकत को फिर से उजागर कर दिया है। शहर के ऊँचे इलाकों, विशेष रूप से खड़गुली और चांदमारी जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बारिश एक बड़ी मुसीबत बन गई है। पिछले कुछ दिनों से जारी लगातार मूसलाधार बारिश ने इन इलाकों की पहाड़ियों को अस्थिर कर दिया है, जिससे भूस्खलन (Landslides) की घटनाएं सामने आने लगी हैं। प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए पहाड़ी ढलानों पर रहने वाले निवासियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।
क्यों हो रहे हैं खड़गुली और चांदमारी में भूस्खलन?
गुवाहाटी एक ऐसा शहर है जो कई छोटी-बड़ी पहाड़ियों से घिरा हुआ है। खड़गुली और चांदमारी जैसे इलाके इन्हीं ढलानों पर बसे हैं। भूस्खलन के पीछे सबसे बड़ा कारण अनियंत्रित निर्माण कार्य और वनों की कटाई है। पहाड़ियों पर बड़ी-बड़ी इमारतों के निर्माण के लिए की गई खुदाई ने मिट्टी की पकड़ कमजोर कर दी है। जब भारी बारिश होती है, तो मिट्टी पानी को सोखकर भारी हो जाती है और ढलान से नीचे खिसकने लगती है। पिछले 24 घंटों में हुई भारी बारिश ने इन मिट्टी के कटाव को और तेज कर दिया है, जिससे लोगों के घरों में दरारें आ गई हैं और रास्तों पर मलबा जमा हो गया है।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की सक्रियता
इसके बाद घटना की जानकारी मिलते ही गुवाहाटी जिला प्रशासन और SDRF की टीमें सक्रिय हो गई हैं।
इसके बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
इसके बाद प्रशासन ने पहाड़ी ढलानों पर रहने वाले परिवारों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
कई जगहों पर मलबे को हटाने का काम जेसीबी से किया जा रहा है ताकि यातायात बाधित न हो।
हालांकि, लगातार बारिश के कारण बचाव दल को भी काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्योंकि एक हिस्सा साफ करने पर ऊपर से दोबारा मलबा आने का खतरा बना रहता है।
लोगों की सुरक्षा और बढ़ता जोखिम
पहाड़ी इलाकों में रहने वाले निवासियों में डर का माहौल है. इसके अलावा, लोग कहते हैं कि वे वर्षों से यहां रहते हैं, पर हर साल बारिश खतरा बढ़ाता है. घर की सुरक्षा को लेकर लोग चिंतित हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर अवैध निर्माण रोका नहीं गया, तो भूस्खलन घातक हो सकता है. अब प्रशासन ड्रेनेज बेहतर बनाने पर काम कर रहा है, ताकि मिट्टी के कटाव को रोका जा सके.
निष्कर्ष और बचाव के सुझाव
गुवाहाटी में भूस्खलन की घटनाएं एक चेतावनी हैं कि हमें प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।
फिलहाल के लिए, खड़गुली और चांदमारी के निवासियों को आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की सलाह दी जाती है।
इसके बाद, प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन आवश्यक है।
अगर आप पहाड़ी इलाके में रहते हैं, तो बारिश के दौरान अपने घर की दीवारों और जमीन में आ रही दरारों पर नजर रखें।
किसी भी असामान्यता के दिखने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
सतर्कता और प्रशासन का सहयोग ही इस आपदा के समय में बचाव का एकमात्र तरीका है।